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बैतुल वन वृत के दो वन मंडल के जगंलों को मिलाकर- बनाया जायेगा प्रदेश का पहला ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व-

बैतुल वन वृत के दो वन मंडल के जगंलों को मिलाकर- बनाया जायेगा प्रदेश का पहला ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व-

वन विभाग की प्रदेश स्तर बैठक के बाद महुपानी मे जनप्रतियो को दी विभागीय अधिकारीयो ने जानकारी-
चिचोली :- (आनंद रामदास राठौर)- अगामी दिनो मे बैतूल वन वृत के दो वन मंडल- क्रमशः पश्चिम वन मंडल- एवं दक्षिण वन मंडल के जंगलों के कुछ हिस्सों को मिलाकर मध्य प्रदेश का पहला ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का गठन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का दायरा 200 वर्ग किलोमीटर में होगा !
प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व बैतुल वन वृत के  दक्षिण वनमंडल क़ी ताप्ती रेंज और पश्चिम वन मंडल के चिचोली वनपरिक्षेत्र के लगभग 150 वर्ग किलोमीटर के जंगल में आकार लेगा।वर्तमान मे यह क्षेत्र मप्र के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच टाइगर कॉरिडोर भी हिस्सा है। इस क्षेत्र के जंगलो मे दुर्लभ प्रजाति का पक्षी फॉरेस्ट ( छोटे आकार के उल्लू जैसी दिखने वाली चिड़िया) आउलेट पाई जाती है।

इस क्षेत्र मे बायसन यानी इंडियन गौर भी यहां अच्छी खासी संख्या में पाए जाते हैं। साथ ही वन क्षेत्र के जंगल के बीच सासबहू नदी, बैतूल नदी और ताप्ती का संगम होता है। इस कारण यह इलाका प्राकृतिक रूप से काफी खूबसूरत है। इसलिए इसका नाम भी ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व रखा जाएगा।

विगत बुधवार को वन मुख्यालय भोपाल मे ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व के गठन को लेकर पहली बैठक हुई। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ शुभरंजन सेन की मौजूदगी में हुई इस बैठक में बैतूल सीसीएफ बासु कनोजिया समेत बैतूल दक्षिण डीएफओ विजयताम टीआर, और बैतूल पश्चिम के डीएफओ वरुण यादव सहित रेंजर भी शामिल हुए।

बैतूल के वन अधिकारियों ने बुधवार को 84 वर्ग किमी में कंजर्वेशन रिजर्व के गठन का प्रस्ताव रखा, लेकिन चर्चा के दौरान सामने आया कि इसका क्षेत्रफल 200 वर्ग किमी तक रखा जा सकता है। इसमे दक्षिण वन मंडल की ताप्ती रेंज एवं पश्चिम वन मंडल की चिचोली रेंज के संरक्षित जंगलों का मिलाकर इसका गठन किया जाए, तो उसमें एक भी राजस्व ग्राम या वन ग्राम नहीं आ रहे हैं।

बैतूल वनवृत के दक्षिण एवं  पश्चिम वन मंडल मे नया प्रस्ताव तैयार करने के लिए 15 दिन की मोहलत मांगी है। दोनों वन मंडल के डीएफओ को 15 दिनों में सभी जनप्रतिनिधियों और आम लोगों को कंजर्वेशन रिजर्व के फायदे और नियम प्रक्रिया भी समझाई जाएगी।

सेंचुरी से इस तरह अलग होगा कंजर्वेशन रिजर्व

कंजर्वेशन रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के सभी नियम लागू होंगे। लेकिन सेंचुरी या टाइगर रिजर्व की तरह आदिवासियों की आजीविका से जुड़ा कोई प्रतिबंध नहीं लगेगा। जैसे स्थानीय लोग तेंदूपत्ता, चिंरौजी, महुआ कलेक्शन का काम बेरोकटोक कर सकेंगे। लकड़ी काटने पर प्रतिबंध रहेगा, लेकिन सूखी लड़की उठाने पर प्रतिबंध नहीं होगा।
खास बात यह है कि कंजर्वेशन रिजर्व का इको सेंसेटिव जोन बनाने का प्रावधान भी कंजर्वेशन रिजर्व पर लागू नहीं होगा। स्थानीय समिति की सहमति से जंगल की नदी-तालाबों में मछली पकड़ने का अधिकार भी आदिवासियों को दिया जा सकेगा। कंजर्वेशन रिजर्व के नजदीक के ग्रामीण इलाकों में होम स्टे, जंगल सफारी, फॉरेस्ट रिसोर्ट बनाए जा सकेंगे। इसके साथ ही फॉरेस्ट टूरिस्ट गाइड की ट्रेनिंग वन विभाग की ओर से दी जाएगी।
शनिवार को दक्षिण वन मंडल की ताप्ती रेंज के महुपानी मे इस प्रोजेक्ट की जानकारी सांझा करने के उद्देश्य को लेकर वन विभाग द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया!
जिसमें भैसदेही विधायक महेंद्र सिंह जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे सहित वन विभाग से सीसीएफ एवं डीएफओ शामिल रहे!


इनका कहना ,
डीएफ ओ - पश्चिम, श्री वरुण यादव

ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व के तहत पश्चिम वन मंडल के चिचोली वन परिक्षेत्र के 160 स्क्वायर किलोमीटर का एरीया शामिल है, इसके अलावा ताप्ती रेंज के जगंलो को भी शामिल किया गया है।

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