Subscribe Us

header ads

क्या है रहस्य- जोगणिया माता का मंदिर- जहॉ चढ़ाई जाती है ,हथकड़ी...64 जोगणिया देवियो के स्वरूप का मूर्तियो मे दर्शन.....

क्या है रहस्य- जोगणिया माता का मंदिर- जहॉ चढ़ाई जाती है ,हथकड़ी

64 जोगणिया देवियो के स्वरूप का मूर्तियो मे दर्शन......
धर्म डेस्क/ चिचोली मीडिया 
जोगणिया माता का मंदिर, राजस्थान के बूंदी में स्थित है. यह मंदिर करीब 1,200 साल पुराना है. माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण बूंदी के संस्थापक राव देव सिंह हाड़ा ने करवाया था. जोगणिया माता को हाड़ा वंश की कुलदेवी माना जाता है. 
जोगणिया माता मंदिर के बारे में कुछ खास बातेंः
इस मंदिर में प्राचीन शिव मंदिर और भैरव मंदिर भी हैं. 
इस मंदिर में महाकाली, महालक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियां भी हैं. 
इस मंदिर में 64 जोगणिया देवियों के स्वरूप की मूर्तियां भी हैं. 
इस मंदिर में हथकड़ियां चढ़ाई जाती हैं. 
इस मंदिर में नवरात्रि के समय लाखों की तादाद में लोग दर्शन के लिए आते हैं. 
इस मंदिर में अष्टमी और शनिवार-रविवार के दिन विशेष तौर पर भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है. 
जोगणिया माता मंदिर के इतिहास से जुड़ी कुछ और खास बातेंः 
इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि चोर-डाकुओं की इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था थी.
मान्यता है कि जब चोर-डाकुओं को जेल हो जाती थी, तो वे वहां से आने के बाद यहां हथकड़ी चढ़ाते थे.
जोगणियां माता मंदिर का इतिहास

माना जाता है कि जोगणियां माता मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है। 9वीं शताब्दी में बंबावदा गढ़ पर हाड़ा वंश का शासन था और जोगणियां माता को हाड़ा वंश की कुलदेवी माना जाता है। मंदिर परिसर में प्राचीन शिव मंदिर और भैरव मंदिर भी स्थित हैं। 1974 में यहां पशु बलि को भी पूरी तरह बंद कर दिया गया। इसके बाद, 1975 में राजस्थान सरकार ने पशु बलि निषेध कानून लागू किया, जो सभी मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर लागू हुआ।
पशु बलि निषेध में रामचंद्र शर्मा अग्रणी भूमिका में

बेगूं निवासी देवीलाल कोठारी ने बताया कि पहलवान मास्टर स्व. रामचंद्र शर्मा पुत्र बद्रीलाल शर्मा, जोगणियां माता में पशु बलि बंद कराने में महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। जब जोगणियां माताजी में पशु बलि निषेध की बैठक बुलाई गई, तो उन्होंने खेत में खड़ी फसल को छोड़कर इस आंदोलन में हिस्सा लिया। पहले लोग मन्नत पूरी होने पर भैंस, बकरे और मुर्गे की बलि चढ़ाते थे, लेकिन शर्मा ने इसके खिलाफ संघर्ष शुरू किया और इसे रोकने में सफलता प्राप्त की।
बकरे की बलि के विरोध में साहसिक कदम

एक बार बकरे की बलि को लेकर विवाद हुआ, तब मास्टर रामचंद्र शर्मा ने अपनी जान की परवाह किए बिना कहा कि बकरे की बलि से पहले मेरी गर्दन काटी जाएगी। इस साहसिक कदम के बाद बलि देने वालों ने अपने कदम पीछे खींच लिए और करीब 100 बकरों को उस दिन बलि से मुक्त किया गया।

"जय जोगणिया"

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ